Hindi Kahani Fansi Ki Saza | फांसी की सज़ा

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Hindi Kahani Fansi Ki Saza

फांसी की सज़ा

राजा वीर सिंह को फूलों से बहुत प्यार था। उसने अपने महल के आसपास ही एक बड़ा सुंदर उपवन बना रखा था। जिसमें तरह-तरह की खुशबू वाले फूलों के पौधे लगे हुए थे। एक दिन उस उपवन में काम करने वाले माली से एक गमला टूट गया। राजा वीर सिंह को जैसे ही मालूम हुआ। उन्होंने उस मालिक को फांसी की सजा सुना दी।

मंत्री ने भी राजा को समझाया। पर राजा वीर सिंह पर कोई असर नहीं हुआ। राजा कुछ सनकी था। उन्होंने घोषणा करवा दी जो व्यक्ति टूटे गमले को ज्यों का त्यों जोड़ देगा, उसे पुरस्कृत किया जाएगा। काफी लोगों ने प्रयास किया, पर सब असफल रहे। अंत में एक महात्मा राजा वीर सिंह के दरबार में आए। वह बोले राजन मैं आपके टूटे गमले को जोड़ने का वचन देता हूं।

पर इतना जान लीजिए, जब यह मनुष्य देह अमर नहीं, तो आपका गमला कैसे शाश्वत रह सकेगा। राजा की अनुमति से महात्मा राजा के साथ सुंदर उपवन में पहुंचे। वहां पर महात्मा ने एक पत्थर से अन्य साबूत गमलों को भी तोड़ डाला। यह देखकर राजा वीर सिंह को महात्मा पर बहुत गुस्सा आया। पर वह चुप रहे।

राजा ने सोचा महात्मा के पास कोई चमत्कार होगा जो शायद टूटे गमले को जोड़ दे। आखिर राजा चुप न रह सका। वह बोल पड़ा – महात्मा जी आपने यह क्या किया ? महात्मा बोले मैंने गमले तोड़कर कई व्यक्तियों की जान बचाई है। आपने एक गमला टूटने पर एक व्यक्ति को फांसी की सजा सुनाई है। महात्मा जी की बात सुनकर राजा को समझ आ गई। उसने मालिक को दी गई फांसी की सजा वापस ले ली।

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